Wednesday, October 20, 2021
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RBI Annual Report : रिजर्व बैंक ने पिछले वर्ष नहीं छापे 2000 के नोट

RBI Annual Report 2019-20 : भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वार्षिक रिपोर्ट 2019-20 जारी कर दिया गया है। भारत के बैंकों के बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया की इस रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था का आर्थिक समीक्षा सहित इसकी दशा व दिशा का पूरा वर्णन है। इस लेख में हम RBI Annual Report के अनुसार 2019-20 में भारतीय मुद्रा ‘रुपया’ व उसकी छपाई और चलन से सम्बन्धित कुछ रुचिकर आंकड़ों पर आपका ध्यान आकृष्ट करेंगे।

रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019-20 में बैंकनोट की संख्या में 6.6 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई। वहीं बैंकनोट के मूल्य के अनुसार यह बढ़ोत्तरी 14.7 प्रतिशत रही। भारत में प्रचलित बैंकनोटों के कुल मूल्य का 83.4 प्रतिशत अकेले रुपये 500 व 2000 के नोटों के रूप में चलन में है। शेष 16.6 प्रतिशत मूल्य के बैंकनोट्स में 2 रुपये से लेकर 200 रुपये तक के नोट शामिल है। वहीं नोटों की संख्या या मात्रा के अनुसार 10 रुपये व 100 रुपये के नोटों का प्रतिशत सबसे अधिक 43.4 है

भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में 2000 रुपये मूल्य के नोटों की छपाई नहीं की है। वर्तमान में दो हजार के नोट का प्रचलन मार्च 2018 में 3.3 प्रतिशत से घटकर मार्च 2020 में 2.4 प्रतिशत तक रह गया है। अंकित मूल्य के हिसाब से देखा जाये तो दो हजार के नोटों की कुल हिस्सेदारी मार्च 2020 तक चलन में जारी कुल नोटों के मूल्य का 22.6 प्रतिशत रह गया है। यह आंकड़ा मार्च 2018 में 37.3 प्रतिशत तक था।

RBI Annual Report

RBI Annual Report : नोटों की छपाई व आपूर्ति

RBI Annual Report के अनुसार मार्च 2018 के अन्त तक दो हजार के नोटों की संख्या 33,632 लाख थी, जो मार्च 2020 के आते-आते 27,398 लाख तक रह गई है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में 2000 के करेंसी नोट की छपाई नहीं की गयी। रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया की नोट मुद्रण इकाईसिक्योरिटी प्रिंटिंग एण्ड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया लि. की ओर से इस दौरान 2000 के नोटों की कोई नई आपूर्ति नहीं की गयी है।

रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि 2019-20 में बैंक नोटों का छपाई का आर्डर पिछले साल की तुलना में 13.1 प्रतिशत तक कम थी। इस समयावधि में आपूर्ति भी 23.3 प्रतिशत घटकर रह गयी। इसका कारण कोविड-19 के कारण देशभर में लगाया गया लॉकडाउन बताया जा रहा है। वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 के बाद से लगभग तीन वर्षों की समयावधि में 500 और 200 रुपये मूल्य के नोट के प्रसार में विशेष बढ़त देखी गयी है। इनका प्रसार इस समयावधि में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।

वर्ष 2019-20 में 500 के 1463 करोड़ नोटों की छपाई का आर्डर दिया गया, जिसमें से 1200 करोड़ नोटों की आपूर्ति पूरी हुई। 2018-19 में 1169 करोड़ नोटों के आर्डर के सापेक्ष 1147 करोड़ नोटों की अपूर्ति प्राप्त हुई थी। भारतीय रिवर्ज बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लि. (BRBNMPL) व सिक्योरिटी प्रिंटिंग एण्ड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया लि. (SPMCIL) ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान 100 रुपये के 330 करोड़ नोट, 50 रुपये के 240 करोड़ नोट, 200 रुपये के 205 करोड़ नोट, 10 रुपये के 147 करोड़ नोट और 20 रुपये के 125 करोड़ नोटों की छपाई का आर्डर प्राप्त किया व लगभग सभी की आपूर्ति पूरा किया गया है।

RBI Annual Report – जाली नोटों का आंकड़ा

पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 20 रुपये के जाली नोटों में 37.7 प्रतिशत, 100 रुपये के जाली नोटों में 23.7 प्रतिशत तथा 2000 रुपये के जाली नोटों में 22.1 प्रतिशत की कमी आई। वहीं 10 रुपये के जाली नोटों में 144.6 प्रतिशत, 50 रुपये के जाली नोटों में 28.7 प्रतिशत, 200 रुपये के जाली नोटों में 151.2 प्रतिशत तथा 500 रुपये के महात्मा गांधी श्रृंखला के नये नोटों में 37.5 प्रतिशत जाली नोटों की बढ़ोत्तरी देखी गयी।

वर्ष 2019-20 में 2000 रुपये के कुल 17,020 जाली नोट पकड़े गये। यह संख्या 2018-19 में 21,847 का था। जाली नोटों के संदर्भ में इस रिपोर्ट के अनुसार कुल 2,96,695 जाली नोट वर्ष 2019-20 के दौरान बैंकिंग क्षेत्रों में पकड़े गये। कुल 4.6 प्रतिशत जाली नोट रिजर्व बैंक द्वारा स्वयं पकड़ा गया। शेष 95.4 प्रतिशत जाली नोटों का पता अन्य बैंकों द्वारा चला।

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