बाबरी विध्वंस मामले में सभी 32 आरोपी हुए बरी, कोर्ट ने कहा नही मिले साजिश के सबूत

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Babri_Masjid
[Babri Masjid, Faizabad]; Unknown; about 1863–1887; Albumen silver print; 15.2 × 20.9 cm (6 × 8 1/4 in.); 84.XA.417.32; No Copyright - United States (http://rightsstatements.org/vocab/NoC-US/1.0/)

6 दिसम्बर 1992 को हुए बाबरी विध्वंस मामले में अदालत ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरलीमनोहर जोशी, कल्याण सिंह और उमा भारती समेत सभी 32 आरोपियों को किया मुक्त, इस संदर्भ में अदालत का फैसला था की, “ मस्जिद विध्वंस के आरोपित व्यक्तियों नें इसके विध्वंसिकरण को बंद कराने का व्यापक तौर पर प्रयत्न किया था।

Babri-Masjid-demolition बाबरी विध्वंस
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जिस मामले के कारण देश की राजनीति में भूचाल आ गया था, उसी बाबरी मस्जिद के विध्वंस वाले मामले का आज अदालत ने फैसला दिया है। इसमें सीबीआई की विशेष दल ने भी अपनी रिपोर्ट पेश की है। बाबरी विध्वंस मामले में आरोपित किए गए सभी 32 लोगो जिनमे की बीजेपी के नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरलीमनोहर जोशी,उमा भारती, कल्याण सिंह सहित सभी को अदालत ने मामले में बड़ी कर दिया है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि ‘आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत उपलब्ध नही है और न ही कोई सबूत ऐसा है जिससे ये साबित हो कि ये घटना पूर्व नियोजित थी।’

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सीबीआई के जज एस.के.यादव की विशेष अदालत ने अपना निर्णय सुनाते हुए कहा कि “इन सभी आरोपियों के खिलाफ कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नही किये गए जो इन्हें इस असामाजिक घटना में दोषी करार दे सके।” साथ ही अदालत ने इसे पूर्व नियोजित घटना मानने से भी इंकार कर दिया है। अदालत का कहना है कि “आरोपियों ने मस्जिद विध्वंस को रोकने का प्रयास किया था न कि तोड़ने का।”
इसके साथ ही अदालत ने इस घटना को असामाजिक भी माना है।

अपने इस फैसले में अदालत ने कहा कि, “6 दिसंबर को वहां कुछ होने की आशंका थी, इस संदर्भ में कुछ खुफिया जानकारी भी स्थानीय स्तर पर प्राप्त हुई थी परंतु प्रशासन ने भी इसे प्राथमिकता नहीं दी।

बाबरी विध्वंस- क्या था पूरा मामला

बाबरी मस्जिद अयोध्या में रामकोट (राम का किला) नामक स्थान पर स्थित थी। माना जाता है इस मस्जिद का निर्माण मुगल बादशाह बाबर के आदेश पर रामजन्मभूमि पर सन 1527 में कराया गया था।
6 दिसंबर 1992 को हिन्दू कारसेवकों की एक भीड़ ने इस मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था।
इस मामले में इन 32 लोगों को आरोपित किया गया था। इन सब पर मस्जिद को तोड़ने की साजिश रचने और दंगे भड़काने का आरोप लगाया गया था।

कौन-कौन थे आरोपी

मस्जिद विध्वंस में कुल 32 लोगो को आरोपी बनाया गया था। जिनमें भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरलीमनोहर जोशी,उमा भारती,कल्याण सिंह, सतीश प्रधान और महंत नित्यानंद गोपाल के साथ कुल 32 लोग आरोपी थे।

सभी ने किया फैसले का स्वागत

बाबरी विध्वंस मामले का निर्णय आने पर सभी ने इसका स्वागत किया है।

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से इस मामले को विशेष अदालत में ले जाने की मांग के साथ कहा कि ” सत्ता हासिल करने के लिए (भाजपा) आरएसएस और इन पार्टियों के नेताओं ने देश की सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे को समाप्त करने की एक राजनीतिक साजिश भी की है, जिसे पूरे देश ने देखा है।”

वही इकबाल अंसारी जो बाबरी मस्जिद के पक्षकार भी रह चुके हैं, उन्होंने अदालत के इस फैसले का प्रसन्नता से स्वागत किया है।

वही असदुद्दीन ओवैसी ने इसे भारतीय न्याय के लिए ‘काला दिन’ बताया है। उनके हिसाब से मुस्लिमों को उनके हक का न्याय नहीं मिला है। इस फैसले को लेकर ओवैसी बिल्कुल भी प्रसन्न नहीं है। उनके हिसाब से फैसला उनके पक्ष में तो बिल्कुल ही नहीं किया गया है। उनका मानना है कि अदालत ने एकतरफा फैसला सुनाया है।

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