Wednesday, October 20, 2021
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उत्तर प्रदेश : भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित आईपीएस अधिकारियों की संपत्तियों की जांच के आदेश

मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक (DGP) से इन मामलों में महोबा-प्रयागराज के निलंबित आईपीएस अफसरों सहित अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच करने को कहा है।
भ्रस्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की अपनी नीति पर अग्रसर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले 24 घण्टे के अंदर 2 बड़े आईपीएस अधिकारियों को न सिर्फ भ्रस्टाचार के आरोप में निलंबित किया। अब इन दोनों आईपीएस अधिकारियों की संपत्ति की पूरी विजलेंस जांच के निर्देश दिए हैं।

Yogi Adityanath
Yogi Adityanath

जिन आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर विजलेंस जांच के आदेश दिए गए है उनमें अभिषेक दीक्षित और मणि लाल पाटीदार शामिल है । इन दोनों अधिकारियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही अपने पदों का दुरुपयोग करने और भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित कर दिया है।
दीक्षित और पाटीदार दोनों को उनके निलंबन की अवधि के लिए डीजीपी के कार्यालय से संबद्ध किया गया है।

प्रयागराज के एसएसपी अभिषेक दीक्षित को जिले में अपराधियों और अपराध पर नकेल कसने में असफल रहने और भ्रष्टाचार में संलिप्तता के चलते निलंबित किया गया है। गृह विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि दीक्षित पर सरकार / मुख्यालय के निर्देशों का ठीक से पालन न करने का भी आरोप है।
वही महोबा के एसपी मणिलाल पाटीदार को भी भ्रष्टाचार के आरोप में तत्काल निलंबित कर दिया गया है। पाटीदार पर ट्रांसपोर्टर्स द्वारा सामानों की परिवहन की अनुमति देने के लिए उनसे पैसे मांगने का आरोप लगाया गया है।

निलंबित अफसरों से जुड़े अन्य पुलिस कर्मियों पर भी गिरी गाज

प्रदेश सरकार द्वारा भ्रस्टाचार के आरोप में निलंबित अफसरों के नजदीकी पुलिसकर्मियों पर भी अब कारवाई हो रही है।
बृहस्पतिवार को इसी क्रम में महोबा के तत्कालीन एसपी और दो एसओ के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। जिले के नवागत एसपी अरुण कुमार श्रीवास्तव ने खन्ना थाने के इंस्पेक्टर राजेश कुमार सरोज, एसओ राजू सिंह और एसओ देवेंद्र शुक्ला और सिपाही राजकुमार कश्यप को निलंबित कर दिया है। इन सब पर बड़े वाहनों के परिवहन में घुस लेने और वाहन स्वामियों को धमकाने का आरोप लगाया गया है।

प्रदेश में हुए पल्स ऑक्सीमीटर और अवरक्त थर्मामीटर की खरीद के जांच एसआईटी को

इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुल्तानपुर, गाजीपुर और राज्य के कुछ अन्य जिलों में पल्स ऑक्सीमीटर और अवरक्त थर्मामीटर की खरीद में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
बताया जाता है कि सुल्तानपुर के जिला पंचायती राज अधिकारी ने सरकार की निर्धारित दर 2880 रुपये के मुकाबले 9950 रुपये की एक अतिरिक्त दर पर पल्स ऑक्सीमीटर और अवरक्त थर्मामीटर खरीदे थे।
इसी प्रकार गाजीपुर में सर्वेक्षण किट 5800 रुपये में खरीदी गई थी जो कि निर्धारित दर 2880 रुपये प्रति किट से लगभग 3000 रुपये अधिक थी।

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