Home साइंस & टेक 2021 में प्रक्षेपित किया जाएगा Chandrayaan-3, नही होगा कोई ऑर्बिटर

2021 में प्रक्षेपित किया जाएगा Chandrayaan-3, नही होगा कोई ऑर्बिटर

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Chandrayaan-3-demo
Chandrayaan-3-demo

चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 के बाद अब इसरो चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) की तैयारियां के साथ ही भारत के पहले मानव मिशन की ओर तेजी से अग्रसर है। अगले कुछ साल इसरो के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

Chandrayaan-2
Chandrayaan-2 Image

भारत अपने तीसरे चंद्र मिशन यानी कि Chandrayaan-3 को लेकर काफी आशान्वित है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 2021 के शुरुआत में प्रक्षेपित करने की तैयारी की है।
इस पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि इसमें चंद्रयान-2 की तरह कोई ऑर्बिटर नही होगा। पर इसमे भी एक लैंडर और रोवर होगा।

भारत के चांद पर उतरने के सपने को पुरा करने में इसरो कोई भी कसर बाकी नही रखना चाहती है। इसी क्रम में अब (Chandrayaan-3) चंद्रयान-3 के जरिये इस सपने को पूरा करने की तैयारी की जा रही है।
बता दे कि चांद की सतह पर उतने की कोशिश भारत ने पहले भी कर चुका है। परन्तु चंद्रयान-2 के लैंडर के चांद की सतह पर सही से उतरने में नाकाम रहने के कारण यह मिशन पूरा नही हो सका था। 7 सितम्बर 2019 में इसके विक्रम लैंडर ने चंद्रमा की सतह पर सही प्रकार से नही उतर सका था। इस के बाद ही इसरो ने चंद्रयान-3 की योजना बनाई थी।

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Chandrayaan-3-demo Image

चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि “कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते इसरो के कई योजनाओं को देरी का सामना करना पड़ रहा है। परंतु इसरो इसे 2021 के शुरुआती महीनों में प्रक्षेपित करने की योजना पर काम कर रही है। (Chandrayaan-3) चंद्रयान-3, चंद्रयान-2 की तरह ही चंद्रमा की सतह पर उतरने का मिशन है। इसमे एक लैंडर और एक रोवर भी होगा। हालांकि चंद्रयान-2 की तरह इसमे कोई भी ऑर्बिटर नही होगा। इसकी जगह इसमे चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर का उपयोग किया जाएगा जो कि अभी सही है और चंद्रमा का चक्कर लगा रहा है।
इसमे अभी भी 7 वर्ष का ईंधन और कार्यक्षमता शेष है।”

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क्या होता है ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर

ऑर्बिटर: एक उपग्रह होता है जो कि पृथ्वी और उस लैंडर के मध्य संपर्क बनाता है। यह लगातार चांद का चक्कर लगाता है। ओर संदेशो को उनके स्थान पर भेजता है।

लैंडर: जिस कैप्सूल या यान में रोवर को चांद की सतह पर उतारा जाएगा। उसे लैंडर कहते हैं लैंडर का सतह पर लैंडिंग मिशन का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। चन्द्रयान-2 इसी में असफल रहा था।

रोवर: चांद की सतह पर चहलकदमी करने के लिए बनाया गया रोबोट ही रोवर होता है। इसमे कई प्रकार से सेंसर और उपकरण होते है जिनसे उक्त सतह के परीक्षण किया जाता है।

Indian_Space_Research_Organisation_Logo
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(Chandrayaan-3) और भारत का पहला मानव मिशन ‘गगनयान’

भारत के पहले मानव मिशन के बारे में जानकारी देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि “covid-19 की वहज से इसरो के कई योजनाओं को देरी का सामना करना पड़ रहा है। इसमे देश का पहला मानव मिशन ‘गगनयान’ भी शामिल है। पर इसरो इसे इसके समयसीमा जो कि 2022 के आसपास रखी गई है,में पूरा करने पर जोर दे रही है। एस्ट्रोनॉट के ट्रेनिंग रूस में जारी है।”

बता दे कि अंतरिक्ष मे मानव भेजने के मिशन में भारतीय वायुसेना के 4 पायलट को चुना गया है। जो कि अभी रूस में ट्रेनिंग ले रहे है। इनमे से 3 को इस मिशन में भेजा जाएगा बाकि एक पायलट को रिज़र्व में रखा जाएगा।

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