Home विदेश स्वीडन में भड़के साम्प्रदायिक दंगे, एन्टी-मुस्लिम एक्टिविटी से देश मे भारी तनाव

स्वीडन में भड़के साम्प्रदायिक दंगे, एन्टी-मुस्लिम एक्टिविटी से देश मे भारी तनाव

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स्वीडन में कथित रूप से कुरान की प्रतियों जलाने संबंधित खबरों से नाराज इस्लामिक संगठनों ने धरना-प्रदर्शन करने के दौरान किया पुलिस पर पथराव। पूरे माल्मो शहर में की गई भीषण आगजनी से जनजीवन अस्त- व्यस्त हो गया है।

स्वीडन का माल्मो शहर इस समय हिंसा और दंगे की आग में जल रहा है, और ये आग अब देश के दूसरे भागो में भी फैल रही है। इसे देखते हुए शहर में बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। इस्लामिक प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी की और पूरे शहर में सड़कों पर खड़े वाहनों, दुकानों में लूटपाट और आगज़नी की। इससे स्थिति बेक़ाबू होता देख पुलिस ने भी बल प्रयोग करते हुए दंगाई भीड़ पर वाटर कैनन, आंसूगैस के गोलों के साथ ही लाठीचार्ज कर हालात काबू करने की कोशिश की है।

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स्वीडिश मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्वीडन के राष्ट्रवादी पार्टी के नेता और उत्तरी यूरोप में हो रहे इस्लामीकरण के धुर विरोधी रैसमस पालूदन को माल्मो में एक सेमिनार में हिस्सा लेना था। परन्तु स्थानीय प्रशासन ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी तथा बिना अनुमति शहर में घुसने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के विरोध में रैसमस के समर्थकों ने शहर के एक चौराहे पर कुरान की कुछ प्रतियां जलाई थी। इस घटना के बाद कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन ने विरोध करते हुए शहर की सड़कों पर खड़ी वाहनों, दुकानों में आगज़नी और पुलिस पर पत्थरबाजी कर दिया। इससे दोनों समुदायों में व्याप्त तनाव हिंसा में बदल गया।

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कौन है रैसमस पालूदन

रैसमस पालूदन स्वीडन की राष्ट्रवादी पार्टी स्ट्रैम कुर्स के संस्थापक है उन्होंने इनकी स्थापना 2017 में की थी।
रैसमस उत्तरी यूरोप जिसमे की डेनमार्क, फिनलैंड, नार्वे, स्वीडन, आइसलैंड, पोलैंड और ग्रीनलैंड जैसे कम आबादी वाले देश में आते हैं, बढ़ते इस्लामिक शरणार्थियों की संख्या के धुर विरोधी माने जाते है। हालांकि पोलैंड ने अपने यहां इन शरणार्थियों के आने पर रोक लगा दी है।

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कौन है ये शरणार्थी क्यो हो रहा है विरोध

अरब और अफ्रीका के कई देशों जिनमे इराक सीरिया, लीबिया और कई अफ्रीकी देश शामिल है, जिनसे गृहयुद्ध या अन्य वजहों से बड़ी संख्या में लोगो का पलायन यूरोप के देशों की ओर होता है।

शरणार्थी विरोधियों का कहना है कि बड़ी संख्या में इन मुस्लिम शरणार्थियों के इन छोटे देशो में आने से यहाँ का सामाजिक तानाबाना नष्ट हो रहा है और अपराधों में भी बड़ी वृद्धि हो गई है।

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